किटकैट की वह सच्चाई जो अभी तक आपसे छुपाई गई

Sameer SR
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चॉकलेट खाना लगभग हर युवा को पसंद होता है । कुछ लोग तो अपनी फ्रिज चॉकलेट से भरे रहते हैं । लड़कों से ज्यादा लड़कियां चॉकलेट खाने की शौकीन हैं। कुछ लोग तो चॉकलेट को अपनी जेब में रखकर घूमते हैं। आज हमारे मार्केट में बहुत सारी चॉकलेट की कंपनियां है और इन चॉकलेट में यह बहुत ही फेमस चॉकलेट है किटकैट। किटकैट को नेस्ले नाम को कंपनी बनाती है। लेकिन क्या आपको पता है कि जिस किटकैट को आप चॉकलेट समझ कर खाते हैं बहुत चॉकलेट नहीं बल्कि कुछ और ही है। किटकैट को चॉकलेट न बनाना एक बिजनेस स्ट्रेटजी। तो चलिए जानते हैं की हम सबकी प्यारी किटकैट चॉकलेट नहीं तो फिर क्या है।

चॉकलेट नहीं तो फिर क्या है किटकैट

जैसा कि हमने बताया कि किटकैट कोई चॉकलेट नहीं है। बल्कि यह तो एक वेफर है जिसपर चॉकलेट की परत चढ़ी हुई है। किटकैट नेस्ले द्वारा बनाया हुआ यह बहुत ही सफल और बहुत ही स्वादिष्ट प्रोडक्ट है । लेकिन नेस्ले ने इसे चॉकलेट की जगह वेफर का स्थान दिया है। ऐसा करने के पीछे क्या वजह हो सकती है चलिए जानते हैं।

क्या है किटकैट को वेफर बनाने की वजह

जैसा कि हमने बताया कि किटकैट कोई चॉकलेट नहीं बल्कि वेफर है जिस पर चॉकलेट की पर चढ़ाई गई। यह नेस्ले का एक प्लान है जिससे वह पैसे बचा सकते हैं। दरअसल यदि कोई कंपनी चॉकलेट बनाती है तो उसे सरकार को 20% टैक्स देना पड़ेगा। उसके विपरीत अगर कोई कंपनी वेफर बनाती है तो उस कंपनी को सरकार को केवल 10 परसेंट ऐसी देना पड़ेगा। यहां पर नेस्ले कंपनी एक पेपर पर चॉकलेट की परत चढ़ा देती है जोकि दिखने में पूरी तरह चॉकलेट ही है। लेकिन यह बात बहुत ही कम लोगों को पता है। यहां तक कि दुकानदारों को भी इस बात की जानकारी नहीं है कि यह कोई चॉकलेट नहीं है बल्कि वेफर है । तो देखा अपने, किस तरह नेस्ले कंपनी ने चालाकी से अपने दिमाग का इस्तेमाल करके 10% टैक्स बचा लेती है। और यह 10 परसेंट नेस्ले जैसी कंपनी के लिए बहुत ही ज्यादा है और जितने में कंपनी बहुत ज्यादा पैसे बचा लेती है। इसके लिए सरकार भी कुछ नही कर सकती क्योंकि ये नियम सरकार ने ही बनाए है।