बोतलबंद वाटर पीने वालों, यह गलती की तो हो जाएगा बड़ी बीमारियों का खतरा । हो जाइए सावधान

Sameer SR
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बोतलबंद पानी पीने वालों, यह गलती की तो हो जाएगा बड़ी बीमारियों का खतरा । हो जाइए सावधान।दोस्तों आज के समय में ज्यादातर जगहों का पानी पीने लायक नहीं है। अब यह वह समय नहीं है जब आप किसी भी नल से पानी निकाल कर किया करते थे। आज से कुछ सालों पहले ही हमारे नालों के पानी इतने साफ रहते थे कि इनसे हमे कभी भी किसी बीमारी का खतरा नहीं रहता था। लेकिन आज की बात करें तो अब यह उतना सुरक्षित नही रहा जितना पहले हुआ करता था। आज के समय में प्रदूषण इतना बढ़ चुका है कि आपको बाहर का पानी पीने से पहले पचास बार सोचना पड़ता है। ऐसे में बोतल बंद पानी ही हमारा सहारा बनते हैं। पानी हमें ज्यादातर दुकानों पर मिल जाते हैं । लेकिन क्या आप जानते हैं अगर इन पानियों को गलत तरीके से पिया तो आपको बड़ी बीमारी की संभावना हो सकती है।

बोतलबंद पानी से क्या है बड़ा खतरा

दोस्तों , आप लोगों ने जरूर ध्यान दिया होगा कि बोतल बंद पानी की बोतल पर एक्सपायरी डेट लिखी होती है। लेकिन आपके दिमाग में यह बता सकती है कि भला पानी किस तरह इस पर हो सकता है। तो हम आपको बता देगी यह एक्सपायरी डेट पानी की नहीं बल्कि उस बोतल की है। अब आपके मन में ये आ सकता है कि प्लास्टिक के गलने में तो हजारों सालों का वक्त लग जाता है, तो यह एक्सपायर कैसे हो सकती है। तो होता यह है कि ये बॉटल काफी समय तक दुकान में आ जाती हैं। और कभी कभी ये बॉटल्स धूप में काफी हफ्तों या कुछ महीनो तक पड़ी रहती हैं। ऐसे में प्लास्टिक के जहरीले तत्व पानी में मिल जाते हैं जिनके रेगुलर इस्तेमाल से आप बीमार पड़ सकते हैं। यहां तक कि आपको कैंसर जैसी बीमारी का सामना भी करना आप सकता है। तो एक बात का ध्यान रखें, बोतलबंद पानी पीने से पहले उसकी एक्सपेयरी डेट जरूर देख लें। उसे अनदेखा करने को गलती न करें।

क्या है बोतलबंद पानी

बोतलबंद पानी आज के समय में वरदान की तरह काम करते हैं। जहां प्रदूषण के कारण हर जगह का पानी गंदा हो गया है, ये स्वच्छ पानी आपको लगभग हर दुकान पर मिल जाता है। लेकिन इस पानी में केवल स्वच्छ पानी नही होता। इस पानी को बोतल में पहुंचने से पहले काफी प्रोसेस से होकर गुजरना पड़ता है। पानी को UV फिल्टर और कई तरह के फिल्टरों से गुजारा जाता है जिससे उसके अंदर सूक्ष्म जीव और बारीक कण अलग निकल जाएं। ऐसा करने से पानी के महत्वपूर्ण खनिज भी निकल जाते हैं। ऐसे में उन कमी को पूरा करने के लिए उस पानी में अलग से खनिज डाले जाते हैं। जिसकी वजह से इस पानी का स्वाद थोड़ा बदल जाता है।